Monthly Archives: June 2014

Parmeshar Singh… by Ahmad Nadeem Qasmi

परमेशर सिंह अहमद नदीम कास्मी  उर्दू से हिन्दी: शीराज़ हसन  अख़्तर अपनी माँ से यूं अचानक बिछड़ गया जैसे भागते हुए किसी जेब से रुपया गिर पड़े. अभी था और अभी गायब. ठनडया पड़ी मगर बस इस हद तक कि लुटे-पिटे क़ाफ़िले … Continue reading

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